पूछो कलियों से ask the buds
पूछना है| तो पूछो उन कलियों से ,जो हर रोज खिलती है| कल तक सूखा जाती है| कोई तोड़ ले गया तो ठीक है| नहीं तो, शाम तक मुरझा जाती है| हजारों के बागों में कोई एक नसीबो वाला| कुछ लोग उसी के साथ टूटे, कोई किसी के पैरों में पड़ा| तो कोई बना महापुरुषों का माला| कुछ वहीं जमीन पर पड़े सूख गए, तो कुछ जमीन पर पड़े फिर भी उठ गए, उठ कर को फिर मुस्कुराती हैं| पर परिंदे का वह डेरा बस आती है| उड़ी तितली गगन से आई, फूलों की पंखुड़ियों को देखकर तरस खाते हैं| उसे उतना लगी प्रेम जो करने, आई थी उसकी दुश्मन बन कर, फिर भी छेद नहीं पाती हैं| अब उसी पंखुड़ियों में उलझ कर, उसकी खुशबू को साथ ले जाना चाहती हैं| पूछना है, तो पूछो उन कलियों से, जो हर रोज खिलती हैं| कल तक सूखा जाती हैं कोई तोड़ ले गया तो ठीक है| नहीं तो शाम तक मुरझा जाते हैं|,,,, मैं शिवा.... have to ask So ask those buds which bloom everyday. Dries till tomorrow. It's okay if someone broke it. Otherwise, it withers away by evening. In the gardens of thousands, only one is lucky. Some people bro...